केतु का १२ भावो में फल

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पहले भाव को हम लग्न भी कहते है, यह हमारे वयक्तित्व को रिप्रेजेंट करता है।

पहले भाव में केतु का फल

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द्वितीय भाव हमारे कुटुंब परिवार को रिप्रेजेंट करता है।

दूसरे भाव में केतु का फल

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तृतीय भाव भाव में केतु के होने पर भाई और बहनो से कोई भी सहयोग पाने की इक्छा का त्याग होने लगता है।

तृतीय भाव में केतु का फल

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चतुर्थ भाव में केतु के होने से मकान या जायदाद के मोह का त्याग होने लगता है

चतुर्थ भाव में केतु का फल

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पंचम भाव में केतु का फल

पंचम भाव में केतू के होने पर संतान सुख की कमी का त्याग हो सकता है

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खष्टम भाव में केतु के होने पर ननिहाल पक्ष से ज्यादा नहीं बनती है

खष्टम भाव में केतु का फल

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सप्तम भाव में केतु के होने पर जीवनसाथी अथवा पार्टनर से मदद की ईच्छा काम होने लगती है

सप्तम भाव में केतु का फल

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अष्टम भाव में केतु का फल

अष्टम भाव में केतु के होने पर ससुराल पक्ष से मोह का भांग होना संभव हो सकता है

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नवम भाव में केतु के होने पर वैराग्य का भाव उत्त्पन्न हो सकता है

नवम भाव में केतु का फल

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दशम भाव में केतु के होने पर आपको अपने ही कर्म पर भरोसा करना चाहिए

दशम भाव में केतु का फल

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एकादश भाव में केतु का फल

एकादश भाव में केतु के होने पर आपके अपने मित्रो के सुख में कमी आ सकती है

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द्वादश भाव में केतु का फल

द्वादश भाव में केतु के होने पर शय्या सुख का त्याग हो सकता है

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